यादोंके खजाने पे बेठा एक साप,
यादो के खजाने मे खट्टे-मीठे फल ;
मैं खाना तो चाहू,
पर कैसे मैं जाऊ …?
खज़ाने पे बेठा एक ज़हेरिला साप….!!!
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खजाने में छुपे हुवे…..
कुछ चमकीले लम्हे, कुछ सुनहरे पल;
कुछ रेशमी रातो के गुज़रे हुए कल-
मैं चुराना तो चाहू-
पर कैसे मैं जाऊ….?
खजाने पे बेठा एक ज़हरीला साप….!!!!
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खजाने में गड़े हुवे…
कुछ टूटे हुवे सपने,कुछ लहु में लिपटे ख़त;
कुछ कचड़े हुवे अरमानोके अनबूजे शब-
मैं दफनाना तो चाहू;
पर कैसे मैं जाऊ…?
खजाने पे बेठा एक ज़हरीला साप…!!!